7 June 2017

गूगल एडसेन्स का नया खता कैसे बनाते हैं? गूगल एडसेन्स से पैसे कैसे कमाते हैं?



गूगल एडसेन्स का नया खता कैसे बनाते हैं? गूगल एडसेन्स से पैसे कैसे कमाते हैं? गूगल एडसेन्स कैसे काम करता है? यूट्यूब वीडियो से पैसे कैसे कमाते हैं? इस सरल हिंदी/उर्दू टूटोरियल से सीखिये।
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विडियो अपलोड करते समय एडवांस्ड सेटिंग्स कैसे करे



How to do Advanced Settings While uploading Video
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यूट्यूब पर वीडियो कैसे अपलोड करते हैं? कंप्यूटर से यूट्यूब पर वीडियो कैसे अपलोड करते हैं? इस सरल हिंदी/उर्दू विडियो से सीखिये।



How To Properly Upload Videos To YouTube
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यू ट्यूब को हिंदी में कैसे देखें ?



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यूट्यूब चैनल क्यों बनाते है नया यूट्यूब चैनल कैसे बनाते है हिंदी विडियो



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गूगल अकाउंट क्या है? गूगल अकाउंट कैसे बनाते हैं?



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यूट्यूब क्या है ? यूट्यूब का क्या उपयोग होता है ? यूट्यूब के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य ओर आंकड़े इस हिन्दी विडियो के माध्यम से जानें 
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9 March 2016

पैन ड्राइव को बूटेबल बनाने का तरीका

           
दोस्तों कभी कभी अचानक आपके कंप्यूटर की डीवीडी ड्राइव खराब हो जाती है और यदि आपको उस वक्त कंप्यूटर पर विंडोज इंस्टॉल करना हो तब आप क्या करेंगे ? लकिन फ़िक्र न करे आज मै आपको बताउँगा की बिना डीवीडी ड्राइव के आप पैन ड्राइव से विंडोज कैसे इंस्टॉल कर सकते है बहुत से लोग ऐसा नहीं कर पाते क्युकी उन्हें मालूम ही नहीं होता कि बिना डीवीडी के भी पेन ड्राइव के द्वारा पीसी में विंडो इस्टाल की जा सकती है बस उनके बूट मेनू में USB वाला ओप्सन्स आना चाहिए अगर आप बिना डीवीडी के अपने सिस्टम में विंडो इस्टाल करना चाहते हो तो इसके लिए आपको एक पेन ड्राइव की जरूरत पड़ेगी और आपको उस पेन ड्राइव को बूटेबल बनाना होगा
आज भी मैं आपको एक ऐसा ही तरीका बताने वाला हूँ आज में आपको जो तरीका बताने वाला हु उसके द्वारा आप किसी भी विंडो जैसे Windows xp, Window 7, Windows 8, Windows10 सभी की बूटेबल पैन ड्राइव बना सकते हो और बूटेबल पेन ड्राइव बना कर आप बहुत ही तेजी से विंडो डाल सकते है
अगर आप भी बूटेबल पैन ड्राइव बनाना चाहते हो तो यहाँ क्लिक करके या फिर आप यहाँ क्लिक करके भी इसे डाउनलोड कर सकते हो

डाउनलोड करने के बाद इसे ओपन करने लेकिन इसे ओपन करने से पहले कम से कम 4 जीबी की पैन ड्राइव अपने सिस्टम के USB पोर्ट में जरूर लगा कर रखे सॉफ्टवेयर ओपन होने के बाद आपको सीडी वाले आइकन पर क्लिक करके अपनी उस ISO फाइल को सलेक्ट करना है जो आपने सेव करी हुई है जैसा आपको ऊपर चित्र में दिखाई दे रहा है आप चाहे तो अपनी बूटेबल डीवीडी को भी सलेक्ट कर सकते हो

ISO फाइल सलेक्ट करने के बाद चित्र के अनुसार NEXT पर क्लिक करे और थोड़ी देर इन्तजार करे कुछ ही देर में आपकी पैन ड्राइव बूटेबल पैन ड्राइव बन जायेगी जिसका इस्तेमाल किसी भी सिस्टम में लैपटॉप में या नेट बुक में कर सकते हो लेकिन ध्यान रहे उस सिस्टम में बूट मेन्यू के अंदर USB वाला ओप्सन्स होना चाहिए तब ही आप अपनी बूटेबल पैन ड्राइव के द्वारा उस सिस्टम में विंडो डाल सकते हो

CCleaner से आपके सिस्टम की स्लो स्पीड को तेज करे
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दोस्तों आपका कम्प्यूटर कितना ही मॅहगा हो लेटेस्ट हो उसकी RAM 2gb से भी ज्यादा क्यों न हो लकिन फिर भी आप जब कंप्यूटर पर काम करते है तो वो हेंग होने लगता है इतना स्लो हो जाता है कि उस पर काम करना मुश्किल हो जाता है पर दोस्तों कंप्यूटर हेंग और स्लो अक्सर उन टेम्पलेरी फ़ाइल के कारण हो जाता है जो हमारे काम करते टाइम आ जाती है

दोस्तों आपका कंप्यूटर भले ही कितना फ़ास्ट हो लेकिन बिना क्लीनप टूल के अधुरा ही रहता है। ज्यादा तर  लोग अपने सिस्टम की स्पीड को कंट्रोल में रखने के लिए CCleaner सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते है। लेकिन अधिकतर लोग इसका नार्मल वर्जन ही इस्तेमाल करते है। जो की सिस्टम की स्पीड कण्ट्रोल रखने की बजाए स्पीड और स्लो कर देता है। लेकिन में जो आपको बताने जा रहा हूँ वो नार्मल वर्जन नहीं बल्कि इसका बिजनेस वर्जन है । जो की आपके सिस्टम की स्पीड स्लो ही नहीं होने देता। आप भी इस सॉफ्टवेयर को डाउनलोड कर इसका पूरा इस्तेमाल करे और अपने सिस्टम कि स्पीड को तेज करे 


इस सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लीक करे
1500 से 2000 रुपये का सोफ्टवेयर मुफ्त में डाउनलोड करे
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दोस्तों आज की इस पोस्ट में मैं आपको बताउँगा की आप 1500 से 2000 का सॉफ्टवेयर फ्री में  किस तरह डाउनलोड कर सकते है आपकी ऑपरेटिंग सिस्टम (windows xp vista etc) में बहुत सी ऐसी सेटिंग होती है जिन्हें सेट करने के बाद आप अपने सिस्टम को और बेहतर बना सकते हो कुछ ऐसी सेटिंग ऐसी जगह छिपी होती है जो हर किसी को नहीं मिलती आज मैं आपके लिए इन्ही सेटिंग को कंट्रोल करने के लिए एक बेहतरीन सॉफ्टवेयर लाया हूँ जिसे डालने के बाद आप विंडो ही हर सेटिंग पर कंट्रोल कर सकते हो जो सॉफ्टवेयर का लिंक में आपको देने वाला हूँ  वो लगभग 1500 रुपये का है लेकिन आपके लिए ये बिलकुल फ्री है इस सॉफ्टवेयर को फ्री में पाने के लिए आपको यहाँ क्लीक करके अपने आप को रजिस्टर करना होगा रजिस्टर करने के बाद आपकी मेल आईडी पर इस सॉफ्टवेयर का सीरियल नम्बर आ जायेगा जिसे आप इस सॉफ्टवेयर में डाल कर फुल वर्जन के रूप में इस्तेमाल कर सकते है और विंडो की सेटिंग को कंट्रोल करके अपने कंप्यूटर की स्पीड बढ़ा सकते है   

23 February 2016

क्या होगा जब हो जायगी इंसान की प्रजाति ख़त्म........

क्या होगा जब हो जायगी इंसान की प्रजाति ख़त्म 



बी बी सी।  क्या अपने कभी सोचा है की यदि दुनिया खत्म हो गयी तो क्या होगा। चलिये जाने दीजिये।आपने वो फ़िल्में तो देखी होंगी, जिसमें दुनिया के ख़त्म हो जाने का ख़ौफ़ दिखाया जाता है. जैसे, 2012 या सेन एंड्रेअस। इंसानियत की तबाही का मंज़र बयां करती ये फ़िल्में अक्सर एक बड़ा सवाल छोड़ जाती हैं कि अगर हक़ीक़त में कहीं ऐसा हुआ तो 
इंसान की प्रजाति कैसे बचेगी ?
मानवता को फिर से ज़िंदा कैसे किया जाएगा ? 
इस सवाल के जवाब में आप कहेंगे कि सिर्फ़ दो लोग मिलकर धरती पर इंसानियत का परचम फिर से लहरा सकते हैं।  नई नस्लें पैदा करने के लिए ज़रूरत होगी सिर्फ़ एक मर्द और एक औरत की।  दोनों के बीच संबंध से जो संतानें पैदा होंगी, वो आपसी रिश्ते से मानवता की नई नस्लों को जन्म देंगी।


ऐसे ही नुस्खे से ऑस्ट्रेलिया के पास एक द्वीप पर झींगे की क़रीब क़रीब ख़त्म हो चुकी नस्ल को ज़िंदा कर दिखाया गया है इस नस्ल के सिर्फ़ दो केकड़े इस टापू पर बचे थे. ऑस्ट्रेलिया के पास लॉर्ड हो द्वीप पर इनकी रिहाइश थी. मगर 1918 में काले चूहों ने इनके ठिकाने पर धावा बोला और इन्हें चट कर गए. ऐसा मान लिया गया था कि इन केकड़ों की नस्ल का सफाया हो चुका है। मगर 2003 में दो खोजी वैज्ञानिकों ने एक चट्टान पर मुश्किल चढ़ाई करके इन दोनों को एक गुफा से निकाला इन्हें लाकर मेलबर्न के चिड़ियाघर में रखा गया. झींगों के इन 'आदम और हव्वा' से आज की तारीख़ में नौ हज़ार लोगों का परिवार जमा हो गया है. कहां तो इनके विलुप्त होने का ख़तरा था और कहां ये बड़ी तेज़ी से फल-फूल रहे हैं  मगर ये बात है केकड़ों की.लेकिन  इंसान के ख़ात्मे की सूरत में ये फॉर्मूला काम आएगा या नहीं, वैज्ञानिकों ने ये पता लगाने की कोशिश की तो कई चुनौतियां सामने आई हैं. कल्पना कीजिए कि आज से सौ साल बाद ऐसी स्थिति आए कि इंसानों के ख़ात्मे की सूरत पैदा हो जाए


जैसे वैज्ञानिक स्टीफ़न हॉकिंग ने भविष्यवाणी की है कि सौ साल बाद इंसान के बनाए हुए रोबोट इतने ताक़तवर हो जाएंगे कि मानवता का ही खात्मा कर देंगे. तो धरती पर इंसानियत को फिर से ज़िंदा करने के लिए एक मर्द और एक औरत की ज़रूरत होगी. इनसे फिर से मानवता को खड़ा किया जा सकेगा. कहने को तो ये सिर्फ़ काल्पनिक सवाल है. मगर नासा जैसे वैज्ञानिक संस्थान और दुनिया के कई अन्य बड़े संस्थान इस बारे में गंभीरता से सोच रहे हैं. असल में उनकी फ़िक्र, इंसानों की दूसरी दुनिया बसाने को लेकर ज़्यादा है. लेकिन, अगर धरती पर क़यामत आ जाए तो? हालांकि, क़ुदरती तौर तरीक़ों के हिसाब से तो सिर्फ़ दो इंसान, यानी एक पुरुष और एक औरत इंसानियत को ज़िंदा कर देंगे. मगर सोचिए, इनकी अगली पीढ़ी में जो बच्चे होंगे, वो भाई-बहन होंगे, जिनके आपसी संबंध से ही अगली पीढ़ी हो सकेगी. ऐसे में इनके बच्चों में एक ही परिवार के गुण होंगे, कमियां होंगी.


मशहूर मनोवैज्ञानिक, सिग्मंड फ्रॉयड कहते थे कि समाज के लिए सबसे ख़राब जो दो बातें हैं उनमें से एक है अपने मां-बाप का क़त्ल और दूसरा, परिवार के लोगों के बीच जिस्मानी ताल्लुक़ात. समाज के लिए तो ये ख़राब है ही, वैज्ञानिक नज़रिए से भी है. जैसे अगर एक ही परिवार के लोगों के बीच संबंध होंगे, तो जो आनुवांशिक बीमारियां हैं, उनका असर पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ता जाएगा. यूरोप के देश चेकोस्लोवाकिया में 1933 से 1970 के बीच पैदा हुए बच्चों के बीच सर्वे हुआ था. पता चला कि जिनके मां-बाप ऐसे थे जो किसी न किसी पुराने रिश्ते से जुड़े थे, उन बच्चों में से चालीस फ़ीसदी किसी न किसी बीमारी के शिकार थे. आख़िर में इनमें से चौदह फ़ीसदी बेवक़्त चल बसे. असल में हम सबके पास अपने जींस की दो कॉपी होती है. इनमें से एक मां से मिलती है तो दूसरी पिता से. लेकिन इनमें से कई जीन ऐसे होते हैं, जो तब तक छुपे रहते हैं जब तक उनका परफेक्ट मैच नहीं मिलता. ऐसा तभी होता है, जब आपके मां-बाप पहले के किसी न किसी रिश्ते से जुड़े हों. ये ख़ुफ़िया जीन, पीढ़ी दर पीढ़ी, छुपते-छुपाते आने वाली नस्लों में ट्रांसफर होती हैं, जैसे ही इनका परफेक्ट मैच मिलता है, ये जाग उठते हैं, हमें बीमार करते हैं. मसलन वर्णांधता या कलर ब्लाइंडनेस की बीमारी को ही लें. आज की तारीख़ में हर तैंतीस हज़ार में से एक इंसान इस बीमारी का शिकार है. ये संख्या बेहद कम है. लेकिन पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित एक छोटे से द्वीप पिंगलैप का हाल इसके ठीक उलट है.


अठारहवीं सदी में भयानक समुद्री तूफ़ान आया और द्वीप में रहने वाले बीस लोगों के सिवा बाक़ी सभी मारे गए. इन बीस लोगों में से एक को कलर ब्लाइंडनेस की बीमारी थी. पीढ़ी दर पीढ़ी, इनके आपसी संबंधों का नतीजा ये हुआ कि आज इस द्वीप पर रहने वाला हर दसवां आदमी इस बीमारी का शिकार है. वैज्ञानिक इसी बात को लेकर ज़्यादा फ़िक्रमंद हैं. क्या हुआ अगर, तबाही हुई और जो दो लोग बच रहे, उनमें से किसी एक में ऐसे ही बीमारी के जीन हुए. होगा ये कि आगे चलकर कई लोग इस बीमारी के शिकार होंगे. ऐसे में मानवता पर आया ख़तरा बीमारी के तौर पर सिर पर सवार होगा.


हालांकि आदम और हव्वा के ऐसे आख़िरी जोड़े की कई संतानें सेहतमंद भी होंगी. लेकिन, बीमारी के छुपे हुए गुणसूत्र वाले लोगों के बीच अगर पीढ़ी दर पीढ़ी रिश्तेदारियां होती रहीं, तो बीमारियां भी ट्रांसफर होती रहेंगी. स्पेन का हैब्सबर्ग राजपरिवार इसकी सबसे अच्छी मिसाल है. इस परिवार का आख़िरी राजा, सत्रहवीं सदी में हुआ चार्ल्स द्वितीय. वो इतनी तरह की बीमारियों का शिकार था कि गिनना मुश्किल. सिर्फ़ 39 साल की उम्र में जब वो मरा तो उसका राज-पाट संभालने के लिए दूर दूर तक कोई रिश्तेदार नहीं था. असल में चार्ल्स द्वितीय से पहले के दो सौ सालों तक, यूरोप के तमाम राजपरिवार एक दूसरे के यहां अपने बेटे-बेटियों का ब्याह करते रहे थे. नतीजा ये कि तमाम बीमारियों के जींस छुपते-छुपाते इकट्ठे होते रहे. नतीजा चार्ल्स के तौर पर सामने आया, यानी बीमारियों का घर. उसको विरासत में इतने बीमार पुश्तैनी जींस मिले थे कि गिनती करना मुश्किल. इससे बेहतर तो शायद तब भी होता जब उसके मां-बाप आपस में भाई बहन होते. कहने का मतलब ये कि अगर, किसी प्रजाति की बहुत कम तादाद बचती है, तो उनका जीन पूल यानी गुणसूत्रों का बैंक, कम होता है. इसमें भी अगर कुछ बीमार जींस हुए, तो अगली पीढ़ियों के विस्तार की उम्मीद कम होती जाती है.


 क्योंकि इनकी आने वाली नस्लों के पास जो जीन पूल होता है, उसमें बीमारी वाले जींस की संख्या बढ़ जाती है. न्यूज़ीलैंड में पाए जाने वाले काकापो नाम के तोते इसका बेहतरीन उदाहरण हैं. बहुतेरी कोशिशों के बावजूद, इनकी संख्या नहीं बढ़ पा रही है और आगे चलकर इस प्रजाति के ख़ात्मे का ख़तरा है. वजह यही है कि इनकी संख्या बेहद कम है. जीन पूल छोटा है. ऐसे में अगली पीढ़ी में बीमारियां ट्रांसफर होती जाती हैं. वैसे क़ुदरती तौर पर हर जीव कोशिश ये करता है कि उसके जीवनसाथी का जीन पूल अलग हो, ताकि आने वाली पीढ़ियों में आनुवांशिक बीमारियां जाने का ख़तरा कम हो. लेकिन, हम जिस तबाही की कल्पना कर रहे हैं, उसमे अगर सिर्फ़ एक मर्द और औरत बच रहते हैं. तो उनके पास विकल्प ही क्या होंगे? वैज्ञानिक ये भी कहते है कि पीढ़ी दर पीढ़ी, तमाम जीव, क़ुदरती चुनौतियों के लिए ख़ुद को तैयार करते हैं, उसके हिसाब से नए ढब सीखते हैं, नए गुण जमा करते हैं. ऐसे में आनुवांशिक बीमारियों का ख़तरा कम होता जाता है. हालांकि ये सब बातें, अभी हवा में ही ज़्यादा हैं. कुछ वैज्ञानिक ये भी कहते हैं कि ये बहस ही बेवजह की है. आख़िर लाखों साल पहले इंसान का जन्म हुआ था तो हज़ार की भी तादाद नहीं थी. आज तमाम सबूत ये कहते हैं कि क़रीब दस लाख साल पहले, सिर्फ़ एक हज़ार इंसान धरती पर थे. फिर इनकी संख्या में इज़ाफ़ा हुआ. लेकिन क़रीब एक लाख से पचास हज़ार साल पहले,जब इंसान अफ्रीका से दुनिया के दूसरे देशों की तरफ़ गए तो भी हालात उनके हमवार नहीं थे. मगर आज इंसानों की इतनी बड़ी तादाद धरती पर है. उसने इतनी तरक़्क़ी कर ली है ऐसे में अगर प्रलय आया और महाविनाश के बाद सिर्फ़ आदम और हव्वा बच रहे


तो भी इंसानियत फिर से ज़िंदा हो उठेगी इसका सबसे अच्छी मिसाल है उत्तरी अमेरिका का हटेराइट समुदाय. इस समुदाय के लोग आपस में ही रिश्ते करते हैं. फिर भी, बीसवीं सदी की शुरुआत में इस समुदाय की जनसंख्या तेज़ी से बढ़ी, सिर्फ़ सत्रह सालों में इनकी आबादी दोगुनी हो गई. ऐसी मिसालें हीं उम्मीद की किरण हैं. तो महाविनाश को लेकर बेफ़िक्र रहिए. अगर प्रलय आया और उससे सिर्फ़ एक मर्द और एक औरत बचे तो भी धरती की आज की आबादी की बराबरी में सिर्फ़ 556 साल लगेंगे. मगर इसकी एक शर्त है. हर औरत कम से कम आठ बच्चे पैदा करे. ये शर्त पूरी करना ही ज़रा मुश्किल है

20 February 2016

भारतीय पत्रकारिता का 
बाजारीकरण




स्वतत्रंता पूर्व भारतीय पत्रकारिता का एक मात्र उद्देश्य आजादी के लिए संधर्ष करना था। उस समय जितने भी समाचार पत्र प्रकासित हुए उन सभी का एक ही लक्ष्य था। अग्रेंजी हुकूमत से भारत को आजादी दिलाना। जैसा कि महात्मा गांधी ने पत्रकारिता के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा है कि पत्रकारिता एक सेवा है और पत्रकार एक सेवक वह नगों को कपड़ा देता है भूखों को अन्न देता है छत विहिन को छाया देता है रोगी को दवा देता है वह मानविय संवेदनाओं से युक्त प्राणी है जो जन को वाणी प्रदान करता है। उस समय समाचार पत्र राष्ट्रप्रेम की भावना जाग्रत कर देश समाज और मानव का उत्थान करना अपना मूल कर्तव्य समझते थे इसके लिये उन्हें अनेक यातनायें झेलनी पड़ी जेल जाना पड़ा और तो और काले पानी की सजा सुनाई गयी। इन सब के बावजूद इन समाचार पत्र में लिखने वाले कलमवीरों ने अपनी लौह लेखनी से अग्रेंजी हुकूमत को दातों तले चने चबवा दिये । न्याय के लिये आफत बुलाना उनका शौक था । वे पैसा और प्रलोभन के कट्टर विरोधी थे। उनके समाचार पत्रों के विचारों एवं समाचारों में गंभीरता थी उस समय के ज्यादातर समाचार पत्र सम्पादकीय दृष्टि से मजबूत थे लेकिन आर्थिक दृष्टि से काफी कमजोर थे। उस समय के समाचार पत्रों ने पाठक सख्ंया बढ़ाने के लिये न सनसनीखेज समाचारों को प्रकाशित किया न ही प्रतिस्पर्धा का आयोजन किया । साथ ही ज्यादातर समाचार पत्रों के सिंध्दात थे वे विज्ञापन नहीं प्रकाशित करेंगे क्योंकि विज्ञापन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को छीनता है। अतः इन समाचार पत्रों की स्थिति बेहद कमजोर होती थी ये कर्ज में दबे रहते थे और समय के साथ बन्द हो जाते थे।
         
                   
                        1947 को भारत देश अग्रेंजों की गुलामी से आजाद हुआ और कुछ वर्षो के बाद समाचार पत्र औधेगिक धरानों द्वारा संचालित होने लगे अब पत्रकारिता मिशनरी न होकर व्यवसाय बन गई और औधोगिक धरानों ने अपने निजी स्वार्थो के चलते पत्रकारों की स्वतन्त्र लेखनी पर अपना प्रभुत्व जमा लिया जिससे मीडिया का स्वामित्व उद्यमियों के हाथों में चला गया। देष के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने 1963 में संगोष्ठी में कहा था कि समाचार पत्र अपने आप में एक बड़ी चीज बड़ा कारोबार बड़ा उद्यम है। किन्तु भारत में यह बड़ा ही दिलचस्प तथ्य है किंतु समाचार अपने आप मे कोई उघम नही है ब्लकि इसका स्वामित्व उघमियो के पास है भारत मे बड़े उघोगपतियो दृारा समाचार पत्र चलाये जा रहे है। वे उसमे हस्तक्षेप कर भी सकते है और नही भी कर सकते है। वे अच्छे लोग हो सकते है। यह बड़े विचार का मुद्दा नही है। किंतु यह सत्य है कि बड़े उघोगो के स्वामित्व मे प्रकाशित समाचार पत्र या समूह को उनके द्रारा वह स्वतंत्रता नही दी जाती जो एक स्वतंत्र संपादक को प्राप्त होती है।  आज मीडिया जिस भी ओघोगिक घरानो का कब्जा है उनका लक्ष्य लोकतांत्रिक न होकर राजनितिक है और साथ ही व्यवसायीमुखी और यही कारण है कि उघोगपतियो द्रारा प्रकाशित पत्रो के बीच राजनितिक विज्ञापन और प्रसार संख्या बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्धा का दोर प्रारंभ हुआ और इसी प्रतिस्पर्धा ने जन्म दिया मीडिया के बाजारीकरण को



स्वतंत्रता पूर्व संपादक के अधीन जहां मालिक और प्रबधंक कार्य करते थे संपादक यदि मालिक द्रारा दी गई सामग्री को उचित नही समझता था तो उसे रद्दी की टोकरी मे डाल देता था और मालिक कुछ भी नही कह सकता था लेकिन आज मालिक ही प्रबधंक और संपादक बन गया और संपादक आज उसके दिशा निर्देश मे कार्य को संपादित कर रहा है। आज बाजारिकरण के दौर मे मीडिया ने अपने कत्वर्यो को भुलाकर और प्रतिस्पर्धा की दौड़  मे आगे निकलने की चाह मे मुनाफे को अधिक जोर देना शुरु कर दिया जिससे नैतिक मुल्यो मे कमी आयी है और मीडिया जगत से जुड़े लोगो मे मानवीय संवेदनाऐ खत्म होती गई।
यह कहने मे संकोच नही है कि मौजूदा प्रत्रकारिता की और जब भी हम नजर डालते है तो हमेशा सिर्फ अंधेरा ही नजर आता है और मीडिया को आज अपनी यही छवी को बदलना होगा। मीडिया समान्यतः वह माध्यम है जो समाज को उगंली पकड़कर कल्याण और उत्थान के मार्ग पर अग्रसर करता है मीडिया समाज को जो दिखाता और सुनाता है समाज वही देखता और सुनता है। यह कहा जा सकता है कि मीडिया समाज का दर्पण है और समाज को सही रास्ते पर लाने का दायित्व मीडिया द्रारा ही संभव है।

6 December 2015

सायबर
क्राइम
क्या
है 
?

सायबर क्राइम ?


आज इंटरनेट ने दुनिया को एक दायरे में समेट दिया है । आप दुनिया के किसी भी कोने में ही क्यों  न रहते हो यदि आपको किसी प्रकार की जानकारी चाहिए तो घर पर बैठे-बैठे आप कंप्यूटर पर उसके बारे में विस्तार से जानकारियां प्राप्त कर सकते है इंटरनेट ने आज सभी को एक दूसरे से जोड़ दिया है साथ ही करोड़ों लोगों की जिंदगी को भी इसने प्रभावित किया है कितने ही लोगों की जिंदगी को बदल कर रख दिया है जहाँ इंटरनेट से लोगों की जिंदगियाँ सफल हुई वही इससे कुछ की जिंदगी मुश्किल में भी आ गई है। इस माध्यम का गलत उपयोग भी लोगों के दुआरा किया जाने लगा है और अब दुरुपयोग होने लगा है। सुरक्षा सिस्टम को भेदने वाले हैकर्स और वायरस ही इसके दुश्मन नहीं हैं, अब मोर्फिग (धड़ किसी का और सिर किसी का लगाकर फोटो बनाना), पोर्नोग्राफी (अश्लील फिल्में), पेडोफाइल (बाल यौन शोषण), सेक्स रैकेट से लेकर लिंग निर्धारण के टेस्ट भी इसके जरिये होने लगे हैं।और भी अनेक अपराध है जिनके बारे में हम आगे बात करेंगे
भारत में साइबर कानून
पूरे विश्व में इसको लेकर कानून भी बनाये गए है हम भारत की ही बात करे तो हमारे देश में इस मामले में जागरूकता बढ़ी है। सरकार ने 2000 में आईटी एक्ट बनाया और 2008 में इसे संशोधित भी किया लेकिन इसके बावजूद साइबर क्राइम को रोकना मुश्किल हो रहा है। दुनिया का सबसे मजूबत कंप्यूटर नेटवर्क भी हैकरों से सुरक्षित नहीं है। पिछले दिनों चीनी हैकरों ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के दफ्तर के कंप्यूटरों को हैक करने की कोशिश की जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया। लेकिन सेना अपने कंप्यूटरों को चीनी हैकिंग से नहीं बचा पाई। इस तरह से देखें तो लगभग यूरोप और अमेरिका तक इन हैकरों से परेशान हैं।
देश में साइबर क्राइम से निपटने के लिए आईटी एक्ट बनाया गया है, जिसमें वेबसाइट ब्लॉक करने तक के प्रावधान हैं।
साइबर कानून या अपराध क्या  है ?
सरल शब्दों में हम कह सकते हैं कि साइबर अपराध गैरकानूनी कृत्य हैं जिसमें कंप्यूटर या तो एक उपकरण है या एक लक्ष्य है । साइबर अपराध पारंपारिक प्रकृति के होते हैं जैसे चोरी, धोखाधड़ी, जालसाजी, मानहानि और शरारत, जो भारतीय दंड संहिता के अधीन हैं। कंप्यूटर के दुरुपयोग ने भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल होकर नए नए अपराधों को जन्म दिया है जिन्हें सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 द्वारा संबोधित किया गया है
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000
सुचना प्रौद्योगिकी बिल 1999 में संसद में प्रस्तुत किया गया और यह संसद के दोनों सदनों में 9 जून 2000 को पास हो गया
सुचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 17 अक्टूबर 2000 से लागू है और सम्पूर्ण भारत में लागू है सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 को सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम 2008 के माध्यम से काफी संशोधित किया गया है

साइबर अपराध निम्नलिखित तरह के होते हैं-



वायरस आक्रमण – इसके तहत साइबर अपराधी कुछ ऐसे सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं जो आपके कम्प्युटर सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं.वे अटैचमैंट के द्वारा( इनमें वायरस, वर्म, टार्जन हॉर्स, लॉजिक हॉर्स) आदि आपके कम्प्युटर पर भेजते हैं



चाइल्ड पोर्नोग्राफी इंटरनेट के बढ़ते चलन से ग्लोबल लेवल पर ब्च्चों को सेक्सुअली नुकसान पहुंचाने के लिए चाइल्ड पोर्नोग्राफी नेट पर काफी बढ़ गई है.चूंकि इंटरनेट की पहुंच अब घर घर तक हो गई है इसलिए बच्चे इस अपराध के आसानी से शिकार हो रहे हैं.इसके तहत अपराधी बच्चों से सम्पर्क करते हैं.उनका विश्वास जीतते हैं और उनके ईमेल से सम्पर्क बनाते हैं और उस सम्पर्क का दुर्पोयग करते हैं



हैकिंग – साधारण भाषा में कह सकते हैं कि किसी के कम्प्युटर सिस्टम में गैरकानूनी तरीके से घुसपैठ करना.इसे क्रैकिंग भी कहते हैं.इस अपराध को करने वाले को हैकर कहते हैं. हैकर अपने लक्षित कम्प्युटर पर रेडीमेड प्रोग्राम के द्वारा अटैक करते हैं. आम तौर पर हैकर धन ऐंठने के लिए इस तरह का काम करते हैं.इसके द्वार क्रेडिट कार्ड की सूचनायें आदि चुराई जाती हैं

फिशिंग – किसी ईमेल यूजर्स के पास ऐसे ईमेल भेजना जिसमें खुद को वैध कारोबारी या इंटरप्राज बताना और यूजर्स को इस बात के लिए प्रेरित करना कि वह अपनी निजी जानकारियां उसे दे.ये अपराधी ईमेल यूजर्स को अनपे इंटरनेट साइट्स पर अपनी सूचनायें अपलोड करने को भी कह सकते हैं.वह यूजर्स से अपना बैंक अकाउंट,पासवर्ड आदि की सूचनायें लेने की कोशिश करते हैं




साइबर स्टाकिंग – इसके तहत साइबर अपराधी अपने लक्षित व्यक्ति को अनेक तरह से परेशान करते हैं.उनके नम्बर पर काल करना, उनका पीछा करना उन्हें तंग करने के लिए लगातार मैसेज करना आदि




सॉफ्टवेयर पाइरेसी – इसके तहत सॉफ्टवेयर की गैरकानूनी तरीके से कॉपी की जाती है और नकली सॉफ्टवेयर का प्रचल बढ़ाने की कोशिश की जाती है जिससे ऑरिजनल साफ्टवेयर का चलन कम हो जाता है और नतीजे में कम्पनियों को नुकसान उठाना पड़ता है


इंटरनेट रिले चैट – सर्वर के चैट रूम पर दुनिया के किसी भी कोने से लोग आकर चैट करके अपने लक्षित व्यक्ति को किसी भी तरह से तंग या परेशान कर सकते हैं



क्रेडिट कार्ड फ्रॉड – इसके तहत अपराधी किसी व्यक्ति के क्रेडिट कार्ड की सूचनाओं के द्वार गैरकानूनी सम्पत्ति की खरीब-बिक्री कर देते हैं. जिसके कारण उस व्यक्ति को आर्थिक हानि के साथ-साथ कई तरह के कानूनी गिरफ्त में आने का भी खतरा रहता है



नेट एक्सटोर्शन – किसी कम्पनी की गुप्त सूचनाओं को कॉपी करके उस कम्पनी से मोटी रकम वसूल करने के अपराध को नेट एक्सटोर्शन कहा जाता है


डिनायल ऑफ सर्विस अटैक – इसके तहत साइबर अपराधी आपके बैंडिविथ को नुकसान पहुंचाने के लिए स्पेम मेल से आपके इनबॉक्स को भर देते हैं और आपको आवश्यक सूचनाओं से वंचित कर देते हैं



साइबर आतंकवाद - इसका उपयोग आतंकवादी गतिविधियों में इंटरनेट आधारित हमलों का वर्णन करने के लिए किया जाता है, जिसमें शामिल है कंप्यूटर वायरस जैसे साधनों के माध्यम से कंप्यूटर नेटवर्क में जानबूझकर, बड़े पैमाने पर किया गया व्यवधान, विशेष रूप से इंटरनेट से जुड़े निजी कंप्यूटर में साइबरआतंकवाद एक विवादास्पद शब्द है। कुछ लेखक बहुत ही संकीर्ण परिभाषा का प्रयोग करते हैं और इसे ज्ञात आतंकवादी संगठनों द्वारा चेतावनी और आतंक पैदा करने के प्राथमिक उद्देश्य से सूचना प्रणालियों के खिलाफ व्यवधान हमले से जोड़ते हैं। साइबरआतंकवाद को किसी भी कंप्यूटर अपराध के रूप में और अधिक सामान्य तरीके से परिभाषित किया जा सकता है, जो असली दुनिया के बुनियादी ढांचे, संपत्ति जा जीवन को अनिवार्य रूप से क्षति पहुंचाए बिना कंप्यूटर नेटवर्क को लक्षित करता है।



16 October 2015

अब फोटोशॉप सीखे हिंदी में भी..............
  

फोटोशॉप इमेज प्रोसेसिंग के लिए प्रयोग होना वाला सबसे पुराना सॉफ्टवेयर है यह Adobe कम्‍पनी द्वारा बनाया गया है इसमे आप ग्राफिक्स बना सकते है और पहले से बने ग्राफिक्स पर काम कर सकते है। इसके अलावा आप कई Incredible तस्‍वीरें बना सकते है



यदि आप फोटोशॉप के लेटेस्ट वर्शन (Adobe Photoshop CS6  )का इस्तेमाल करना चाहते है तो उसके लिए यह जरूरी है कि आपके कंप्यूटर मे काम से काम पेंटियम 4 प्रोसेसर हो और 256 एमबी रेम हो। आपके कंप्यूटर की प्रोसेसिंग गति और मेमोरी जितनी ज्यादा होगी फोटोशॉप जैसा सॉफ्टवेयर उतनी ही तेजी से काम करेगा 

System requirements | Photoshop

Windows

  • Intel® Core 2 or AMD Athlon® 64 processor; 2 GHz or faster processor
  • Microsoft Windows 7 with Service Pack 1, Windows 8.1, or Windows 10
  • 2 GB of RAM (8 GB recommended)
  • 2 GB of available hard-disk space for 32-bit installation; 2.1 GB of available hard-disk space for 64-bit installation; additional free space required during installation (cannot install on removable flash storage devices)
  • 1024 x 768 display (1280x800 recommended) with 16-bit color and 512 MB of VRAM (1 GB recommended)*
  • OpenGL 2.0–capable system
  • Internet connection and registration are necessary for required software activation, validation of subscriptions, and access to online services.**
अगर आप फोटोशॉप सिखना चाहते है तो यहां क्लिक करके फोटोशॉप को डाउनलोड करें और अपने कंप्यूटर मे डाल ले वैसे तो फोटोशॉप मे बहुत से टूल्स है जिनका अपना अपना कार्य है 
फोटोशॉप की मदद से आप फोटोशॉप में पासपोर्ट साइज़ की फ़ोटो बना सकते हो पासपोर्ट साइज़ की फ़ोटो का इस्तेमाल किसी ना किसी रूप में होता रहता है फ़ोटो स्टूडियो से पासपोर्ट फ़ोटो खिचवाने में बहुत महंगा पड़ता है अगर आपको फोटोशॉप में पासपोर्ट फ़ोटो बनाना आ जाता है तो आप किसी भी लेब में जाकर उसका प्रिंट आउट मात्र 5 रूपये में ले सकते है जो मैं आपको पासपोर्ट साइज़ का फ़ोटो बनाना बता रहा हु वो 4x6 के साइज़ पर बता रहा हु 4x6 के फ़ोटो साइज़ का रेट हर लेब पर 5 रूपये है आपको 5 रूपये में 8 पासपोर्ट साइज़ की फ़ोटो मिल जायेगी
अब शुरुआत करते है
  • फोटोशॉप की पासपोर्ट फ़ोटो बनाने के लिए अपने फोटोशॉप को ओपन करे
  • ऊपर टूलबार में File पर क्लीक करके Opan पर क्लीक करे और वो फ़ोटो खोले जिसकी आपको पासपोर्ट साइज़ कि फ़ोटो बनानी है
  • फ़ोटो ओपन होने के बाद आपको क्रॉप टूल को सलेक्ट करना है क्रॉप का इस्तेमाल फ़ोटो को सलेक्ट किये हुवे भाग को काटना होता है इस टूल का इस्तेमाल हम फ़ोटो का साइज़ सलेक्ट करने में भी करते है
  • क्रॉप टूल सलेक्ट करने के बाद आपको ऊपर बुक्स में Width में 1.4 Height में 1.7 और Resolution में 300 लिख कर एंटर का बटन दबा देना है
  • अब इस टूल से फ़ोटो को सलेक्ट करे सलेक्ट करते ही आपका फ़ोटो उसी साइज़ में कट जाएगा जो साइज़ आपने ऊपर बॉक्स में लिखा है
  • फ़ोटो का साइज़ बनाने के बाद ऊपर टूलबार में File पर क्लीक करके New पर क्लीक करे क्लीक करते ही आपने सामने एक विंडो खुल जायेगी
Width 6 inches 
Height 4 inches 
Resolution 300 inches
Color Mode RGB Color
Background White  सलेक्ट करना है सलेक्ट करके ओके कर दे ओके करते ही आपकी एक न्यू फ़ाइल बन जायेगी जिसका साइज़ 4x6 inches होगा
  • अब आपको मूव टूल सलेक्ट करना है इस टूल को सलेक्ट करने के बाद ऊपर Auto-Select वाले बॉक्स पर याद से सलेक्ट कर दे अगर आप Auto-Select वाले बॉक्स पर राईट का निशान नहीं लगाएंगे तो आपका मूव टूल काम नहीं करेगा
  • अब आप मूव टूल से फ़ोटो को माउस से पकड़ कर उस फ़ाइल में डाले जो आपने 4x6 साइज़ की बनायी है 
  • नयी फ़ाइल में फ़ोटो आने के बाद आप फ़ोटो पर क्लीक करे और कीबोर्ड से Alt का बटन दबा कर फ़ोटो की एक और लेयर या कॉपी बना ले किसी फ़ोटो की 2 या कितनी भी लेयर बनाने के लिए हम Alt बटन के साथ फ़ोटो को ड्रेग करके न्यू लेयर बना सकते है या फिर Ctrl J का बटन दबा कर भी न्यू लेयर बना सकते है
  • नयी लेयर बनाने के बाद आपके सामने लेयर बॉक्स में Layer 1 और Layer 1 Copy के नाम से आपको 2 लेयर दिखायी देगी 
  • अब आप Layer 1 Copy पर क्लीक करके कीबोर्ड से Ctrl E का बटन दबाये ऐसा करते ही आपकी दोनों लेयर जुड़ जायेगी
  • अब आप फ़ोटो पर क्लीक करके और कीबोर्ड से Alt का बटन दबा कर फ़ोटो की 3 लेयर या कॉपी बना ले 
  • अब आप Layer 1 Copy 3 पर क्लीक करके कीबोर्ड से Ctrl E का बटन 3 बार दबाये ऐसा करते ही आपकी चारो लेयर जुड़ जायेगी
  • अब आपके सामने एक ही लेयर होगी अब आप माउस से फ़ोटो को सलेक्ट करके बनी हुई फ़ोटो को बिच सेंटर में सेट कर सकते है 
  • अब आपकी फ़ोटो बनकर तैयार है अब इसे कीबोर्ड से Ctrl S का बटन दबा कर सेव करे Ctrl S का बटन दबा कर जो आपके सामने विंडो खुलेगी उसमे आपको JPEG फ़ाइल को सलेक्ट करके फ़ोटो को सेव करना है 
अगर आपके अन्‍दर एक कलाकार छिपा है तो Photoshop आपके लिये अनन्‍त संभावनाओं की दुनिया है, दुनियाभर में Photoshop के द्वारा बहुत से लोग Business भी कर रहे है, और जिससे उनकी अच्‍छी खासी कमाई भी हो रही हैं। अगर आप एक Professional फोटोग्राफर हैं, और आपका हाथ फोटोशॉप में साफ हो जाता है तो आपके लिये रोजगार के कई अवसर हो सकते हैं या आप घर बैठे अपना Business शुरू कर सकते हैं।

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